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    <Article>
            <Journal>
    			<PublisherName>Ms. Kiran Kaur</PublisherName>
    			<JournalTitle>Indian Journal of Modern Research and Reviews</JournalTitle>
    			<Issn>2584-184X</Issn>
    			<Volume>4</Volume>
    			<Issue>1</Issue>
    			<PubDate PubStatus="epublish">
    				<Year>2026</Year>
    				<Month>January</Month>
    				<Day></Day>
    			</PubDate>
    		</Journal>
            <ArticleTitle>रामायण एवं महाभारत में भारतीय संस्कृति में योगदान</ArticleTitle>
            <VernacularTitle></VernacularTitle>
    		<PageNumber>29-31</PageNumber>
            <ELocationID EIdType="doi">https://doi.org/10.5281/zenodo.18173521</ELocationID>
    			
            <Author></Author>
            <PublicationType>Journal Article</PublicationType>
    			
    		<History>
    			<PubDate PubStatus="received">
    				<Year>2026</Year>
    				<Month>01</Month>
    				<Day>07</Day>
    			</PubDate>
    		</History>
    			
    		<Abstract>
    		    भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध संस्कृतियों में से एक है, जिसकी निरंतरता, सहिष्णुता और जीवन-मूल्यपरक दृष्टि इसे विशिष्ट बनाती है। इस संस्कृति के निर्माण, संरक्षण एवं विकास में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है। ये दोनों ग्रंथ न केवल साहित्यिक कृतियाँ हैं, बल्कि भारतीय समाज की सामूहिक चेतना, नैतिक मूल्यों, सामाजिक संरचना तथा दार्शनिक चिंतन के आधार स्तंभ भी हैं।

रामायण भारतीय संस्कृति के आदर्शवादी स्वरूप को प्रस्तुत करती है, जहाँ धर्म, मर्यादा, कर्तव्य, पारिवारिक मूल्य और आदर्श शासन की संकल्पना स्पष्ट रूप से उभरकर आती है। इसके विपरीत, महाभारत जीवन की यथार्थवादी जटिलताओं, धर्म के द्वंद्वात्मक स्वरूप, सत्ता-संघर्ष, नैतिक दुविधाओं तथा सामाजिक प्रश्नों को उजागर करता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का समन्वय भारतीय सांस्कृतिक चेतना को दार्शनिक गहराई प्रदान करता है।

प्रस्तुत शोध में रामायण और महाभारत में निहित सांस्कृतिक तत्त्वों का तुलनात्मक, विश्लेषणात्मक एवं आलोचनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि ये दोनों महाकाव्य मिलकर भारतीय संस्कृति को संतुलित, जीवंत और कालातीत स्वरूप प्रदान करते हैं, जिसकी प्रासंगिकता समकालीन वैश्विक संदर्भों में भी बनी हुई है।    		</Abstract>
    		
    		<ObjectList>
    			<Object Type="keyword">
    			<Param Name="value">रामायण, महाभारत, भारतीय संस्कृति, धर्म, कर्म, मर्यादा, आदर्शवाद, यथार्थवाद, नारी चेतना, राजधर्म, श्रीमद्भगवद्गीता</Param>
    			</Object>
    		</ObjectList>
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