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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2025; 3(4): 73-76

भारतीय समाज की आंतरिक संरचना पर विलुप्त होते प्राकृतिक संसाधनों का अध्ययन

Author Name: प्रोफेसर डॉ संतोष कुमारी

1. विभाग समाजशास्त्र जैन कन्या पीजी कॉलेज मुजफ्फरनगर,उत्तर प्रदेश भारत

Abstract

<p>भारतवर्ष संपूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखता है। इसका मुख्य कारण भारत की प्राकृतिक संपदा में खनिज है जिसने भारत को विश्व में एक अलग पहचान वह भारतीयों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने का कार्य किया है। भारत ने केवल कुछ प्राकृतिक संसाधनों का निर्यात करता है। बल्कि विश्व में सर्वोच्च उत्पादकता गुणवत्ता की श्रेणी में प्रथम स्थान भी रखता है आज भारतीय संसाधन चाहे वह ऊर्जा के स्रोत हो<em>, </em>चिकित्सा अथवा अन्य प्रकार के संसाधन जो मानव जीवन के लिए अति आवश्यक है का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि आने वाले कुछ दिनों वर्षों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन मनुष्य पूर्ण रूप से कर लेगा यह समस्या ने केवल भारतवर्ष की बल्कि संपूर्ण विश्व की एक अहम समस्या है। भारतवर्ष में भी बढ़ती हुई जनसंख्या व प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का प्रभाव मानव के जीवन पर वह मानव के स्वास्थ्य पर सीधा-सीधा देखा जा सकता है। मानव के साथ-साथ ही जीव जंतुओं पर भी प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का प्रभाव साफ-साफ देखा जा सकता है इसका कारण यह है कि वर्तमान में कुछ जीवन की प्रजातियां ऐसी है। जो पूर्ण रूप से विलुप्त हो चुकी है इस शोध पत्र में इन्हीं समस्याओं का अध्ययन किया जाएगा कि किस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों का विरोधिकरण मानव समाज को या भारतीय समाज को प्रभावित कर रहा है।</p>

Keywords

भारतीय समाज, आंतरिक संरचना, विलुप्त, प्राकृतिक संसाधन।