Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(1): 237-242
भारत में लैंगिक न्याय: एक अध्ययन
Author Name: धनन्जय कुमार, डॉ संजना गुप्ता
Abstract
<p>लैंगिक न्याय किसी भी लोकतांत्रिक और समावेशी समाज की आधारशिला है। भारत जैसे बहुसांस्कृतिक और सामाजिक रूप से विविध देश में लैंगिक न्याय की अवधारणा केवल कानूनी समानता तक सीमित नहीं है<em>, </em>बल्कि यह सामाजिक<em>, </em>आर्थिक<em>, </em>राजनीतिक और सांस्कृतिक समानता से भी गहराई से जुड़ी हुई है। प्रस्तुत अध्ययन भारत में लैंगिक न्याय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि<em>, </em>संवैधानिक प्रावधानों<em>, </em>सरकारी नीतियों एवं योजनाओं<em>, </em>सामाजिक संरचनाओं तथा समकालीन चुनौतियों का समग्र विश्लेषण करता है।</p>
<p>अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को समानता<em>, </em>स्वतंत्रता और गरिमा का अधिकार प्रदान किया है<em>, </em>किंतु पितृसत्तात्मक मानसिकता<em>, </em>शैक्षिक असमानता<em>, </em>आर्थिक निर्भरता<em>, </em>राजनीतिक भागीदारी की कमी और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा जैसे कारक लैंगिक न्याय की राह में प्रमुख बाधाएँ बने हुए हैं। शोध में घरेलू हिंसा<em>, </em>यौन उत्पीड़न<em>, </em>साइबर अपराध<em>, </em>महिला स्वास्थ्य<em>, </em>मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर असमानता जैसे वर्तमान सामाजिक मुद्दों का भी विश्लेषण किया गया है।</p>
<p>इसके साथ ही<em>, “</em>बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”<em>, </em>उज्ज्वला योजना<em>, </em>महिला शक्ति केंद्र<em>, </em>महिला आरक्षण<em>, </em>स्वयं सहायता समूह<em>, </em>डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम और <em>STEM </em>शिक्षा जैसी सरकारी पहलों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि शिक्षा<em>, </em>आर्थिक सशक्तिकरण<em>, </em>तकनीकी हस्तक्षेप<em>, </em>सामाजिक जागरूकता अभियानों और पुरुषों की सहभागिता के माध्यम से लैंगिक न्याय को सुदृढ़ किया जा सकता है।</p>
<p><strong>निष्कर्षतः</strong><em> </em>यह शोध प्रतिपादित करता है कि लैंगिक न्याय केवल महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रश्न नहीं है<em>, </em>बल्कि यह समग्र सामाजिक विकास और राष्ट्र की प्रगति से जुड़ा हुआ विषय है। भारत में वास्तविक लैंगिक समानता प्राप्त करने के लिए कानूनी सुधारों के साथ-साथ सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन<em>, </em>नीति-निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और शिक्षा-आधारित सशक्तिकरण अनिवार्य है।</p>
Keywords
लैंगिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, भारतीय संविधान, सामाजिक जागरूकता, राजनीतिक
