इस लेख में विवेकानन्द के मानवतावादी दृष्टिकोण को ऐतिहासिक संदर्भ में उनके मानव धर्म, दरिद्रनारायण की अवधारणा और सेवा भाव के माध्यम से विश्लेषित किया गया है। उनकी सोच में आध्यात्मिक और ईश्वरीय विचारधारा भी समाहित रही। उन्होंने मानव सेवा को ईश्वर सेवा के समान माना। उनका विश्वास था कि सच्ची सेवा मानव सेवा है। प्रत्येक धर्म की सच्चाई केवल सत्य में निहित होती है। वे किसी ऐसे धर्म को नहीं मानते जो मानवता को प्राथमिकता न दे। उनका मानवतावादी दृष्टिकोण आधुनिक भारत की सामाजिक प्रगति का मुख्य आधार बना।
मानववाद, मानवतावाद, मानवधर्म, रामकृष्ण परमहंस, अद्वैतवाद, वेदांत, आध्यात्मिक एकता।
. विवेकानंद का मानव धर्मः एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2025; 3(6):80-83
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