इक्कीसवीं सदी के उपन्यासों की भाषा और इसकी अभिव्यक्ति का अध्ययन आवश्यक है। इसमें संवाद का प्रयोग और सांस्कृतिक संदर्भ पर पूरा ध्यान देना चाहिए। नई सदी में साहित्य के बोलने का तरीका बदला है। लेखक अपनी बात सीधे और साफ तरीकों से कहता है। यह बदलाव साहित्य में जीवन की नई झलक लेकर आया है। संवाद और संस्कृति के मेल से कहानी में गहराई और समझ बढ़ती है। इससे वाचकों को कहानी से जुड़ने का अनुभव होता है। नई भाषा में भावनाओं का भी विस्तार हुआ है। यह अध्ययन हमें समझने में मदद करता है कि लेखक कैसे नई भाषा को प्रयोग करता है। 21वीं सदी के उपन्यासों की भाषा और शैली का निरीक्षण किया गया है। इन नए दौर के उपन्यासों में शब्दों का प्रयोग आसान और स्पष्ट हो गया है। इन उपन्यासों में पारंपरिक प्रयोग कम होकर रोज़मर्रा की भाषा अधिक हो गई है। नई शैली में नए अनुभव और समझ पैदा होते हैं। इन सब बदलावों ने इन उपन्यासों को पढ़ने में आसानी और रुचि दोनों को बढ़ावा दिया है।
इक्कीसवीं सदी, भाषा शैली, अभिव्यक्ति, संवाद और संस्कृति
. इक्कीसवीं सदी के उपन्यासों की भाषा शैली और अभिव्यक्ति का अध्ययन : संवाद और सांस्कृतिक संदर्भ. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2025; 3(9):86-88
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