हम सभी जानते हैं कि भारतीयों का मुख्य व्यवसाय कृषि से अपनी आय अर्जित करना वह देश की उन्नति में अपना योगदान देना है कृषि ग्रामीण क्षेत्रों में आय का एक प्रमुख स्रोत है ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग कृषि उत्पादन से ही अपनी आय अर्जित में आजीविका चलाते हैं। साथ ही साथ देश भी आर्थिक रूप से कृषि पर आधारित है। यदि यह कहा जाए कि ग्रामीण क्षेत्रों में ही भारतीय आत्मा का निवास है तो इसे नकारा नहीं जा सकता जिस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष व्यवसाय के रूप में मुख्यतः कृषि चुनते हैं इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी भी प्रत्येक क्षेत्र में देखी जा सकती है ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अपने आप को आर्थिक तोर पर सक्षम समर्थ बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यवसायों का चुनाव कर रही है। चाहे वह पशुपालन हो चाहे वह किसी प्रकार के हथकरघा कड़ाई से जुड़ा हुआ कोई व्यवसाय हो अथवा राजनीतिक रूप से सक्रियता भी महिलाओं की ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक रूप से देखी जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर होकर अपने आप को ही नहीं बल्कि समाज व राष्ट्र को भी आर्थिक सहायता में विकसित बनाने का कार्य कर रही है। महिलाएं पिछले कुछ दशकों में स्वयं तो आत्मनिर्भर बनी है। साथ ही साथ उन्होंने अपने परिवार को भी सक्षम में विभिन्न आयाम अधिक समर्थ बनाने का कार्य किया है इसके विभिन्न उदाहरण समाज में देखने को आज मिल सकते हैं इस शोध पत्र में यही अध्ययन किया गया है कि किस प्रकार ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अपने आप को आर्थिक व्यावसायिक व राजनीतिक रूप से सक्रियता प्रदान कर रही है वह किस प्रकार अपनी भागीदारी समाज व राष्ट्र के विकास में लग रही हैं।
भारतीय समाज, ग्रामीण क्षेत्र, महिलाएं, आर्थिक, राजनीतिक, व्यवसायिक।
. भारतीय समाज में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक, व व्यावसायिक स्थिति का अध्ययन।. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2024; 2(12):56-59
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