Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(10): 55-65
-राजनीति से परे: बहु-क्षेत्रीय और असममित युद्ध के युग में कौटिल्य के मण्डल सिद्धान्त की प्रासंगिकता (Beyond Geopolitics: Relevance of Kautilya’s Mandala Siddhanta in the Era of Multi-Domain and Asymmetric Warfare.)
Author Name: Dr. Arvind Kumar, Prashant Kumar Pandey
Abstract
<p>21वीं सदी का वैश्विक सुरक्षा ढांचा एक अभूतपूर्व रणनीतिक संक्रमण काल से गुजर रहा है। समकालीन संघर्षों की बहु-आयामी प्रकृति ने थॉमस हॉब्स<em>, </em>हंस जोआचिम मोर्गेंथाउ <em>, </em>और केनेथ वाल्ट्ज़ जैसे पश्चिम-केंद्रित यथार्थवादी (Westphalian Realist)<em> </em>सिद्धांतों की सीमाओं को उजागर कर दिया है<em>, </em>जो आज के हाइब्रिड और नेटवर्क-आधारित युद्धों को समझाने में संकुचित सिद्ध हो रहे हैं। यह शोध पत्र मिलिट्री साइंस (सैन्य विज्ञान) के दृष्टिकोण से आचार्य कौटिल्य के मण्डल सिद्धान्त (Theory of Circles)<em> </em>और उनके द्वादशराज मण्डल (12 Kings Matrix)<em> </em>का एक अभिनव पुनर्मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। लेख का मुख्य तर्क यह है कि प्राचीन भारतीय सामरिक चिंतन में निहित भौगोलिक संकेंद्रित वृत्त केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं<em>, </em>बल्कि वे आधुनिक मल्टी-डोमेन वॉरफेयर (cyber, space, and information domains)<em> </em>तथा असममित (Asymmetric<em>) </em>युद्ध कला के अदृश्य मोर्चों पर भी पूरी तरह सटीक बैठते हैं। यह शोध यह विश्लेषण करता है कि कैसे तकनीकी एकीकरण और <em>'</em>ग्रे-जोन ऑपरेशंस<em>' </em>के इस दौर में <em>'</em>अरि<em>' (</em>शत्रु) और <em>'</em>मित्र<em>' </em>के पारंपरिक समीकरण बदल चुके हैं<em>, </em>तथा <em>'</em>उदासीन<em>' </em>(Neutral)<em> </em>एवं <em>'</em>मध्यम<em>' </em>(Intermediary)<em> </em>राज्यों की भूमिका वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर रही है। अंततः<em>, </em>यह पत्र पश्चिमी सिद्धांतों की बाइनरी (द्विध्रुवीय) सोच को चुनौती देते हुए रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)<em> </em>और बहु-संरेखण (Multi-alignment)<em> </em>को समझने के लिए कौटिल्य के मण्डल को एक गतिशील<em>, </em>लचीला और व्यावहारिक <em>'</em>सामरिक सॉफ्टवेयर<em>' </em>के रूप में स्थापित करता है।</p>
Keywords
मण्डल सिद्धान्त, द्वादशराज मण्डल, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, असममित युद्ध, तूष्णीं युद्ध, रणनीतिक स्वायत्तता, हाइब्रिड युद्ध कौशल।
