Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(10): 108-110
ऋग्वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल में महिलाओं की सामाजिक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन
Author Name: श्री रितेश कुमार नायक
Abstract
<p>भारतीय सभ्यता व संस्कृति के विकास में वैदिक काल का विशेष महत्व है। वैदिक काल को सामान्यतः दो भागों -ऋग्वैदिक काल तथा उत्तर वैदिक कालक्रम में विभाजित किया जाता है। इन दोनों ही कालों में महिलाओं की सामाजिक<em>, </em>धार्मिक<em>, </em>शैक्षिक तथा आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिलता है। जहां एक ओर ऋग्वैदिक काल में महिलाओं को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता<em>, </em>सम्मान तथा समान अधिकार प्राप्त थे<em>, </em>जबकि उत्तर वैदिक काल में उनकी स्थिति में क्रमशः गिरावट आने लगी। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य इन दोनों कालों में महिलाओं की सामाजिक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में शिक्षा<em>, </em>विवाह<em>, </em>संपत्ति अधिकार<em>, </em>धार्मिक सहभागिता<em>, </em>राजनीतिक भूमिका तथा सामाजिक सम्मान जैसे प्रमुख आयामों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः यह स्पष्ट होता है कि समय व सभ्यता के परिवर्तन के साथ सामाजिक<em>, </em>आर्थिक एवं धार्मिक परिवर्तनों के कारण महिलाओं की स्वतंत्रता एवं अधिकारों में महत्वपूर्ण हुए।</p>
Keywords
ऋग्वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, महिला, सामाजिक स्थिति, शिक्षा, विवाह, संपादिता अधिकार।
