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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(10): 159-162

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आदर्शवादी और यथार्थवादी दृष्टिकोण का एक तुलनात्मक अध्ययन

Author Name: डॉ. सुशील दत

1. सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय महिला महाविद्यालय गुरावडा, रेवाडी, हरियाणा, भारत

Abstract

<p>अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन में दो प्रमुख सैद्धांतिक दृष्टिकोण - आदर्शवाद और यथार्थवाद हैं। ये राष्ट्रों की राजनीति को समझने के अलग-अलग तरीके बताते हैं। आदर्शवाद देशों में शांति बनाए रखना<em>, </em>सहयोग को बढ़ावा देना<em>, </em>अंतरराष्ट्रीय कानून<em>, </em>नैतिकता<em>, </em>लोकतंत्र और विश्व भर की संस्थाओं पर जोर देता है। यथार्थवाद अपने-अपने देशों की शक्ति<em>, </em>राष्ट्रीय हितों<em>, </em>सुरक्षा और संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को केंद्र में रखता है तथा जरूरत पड़ने पर देश अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत सेना रखता है। इस शोध-पत्र में दोनों विचारों की उत्पत्ति<em>, </em>मुख्य विचार<em>, </em>प्रमुख विद्वानों का योगदान<em>, </em>उनकी सीमाओं<em>, </em>आपसी तुलना और दोनों के बीच के अंतर का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है और साथ में ही ऐतिहासिक और वर्तमान घटनाओं के उदाहरण से इसको समझने का प्रयास किया गया है।</p>

Keywords

अंतरराष्ट्रीय, आदर्शवाद, यथार्थवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, नैतिकता, लोकतंत्र।