editor.mrrjournal@gmail.com +91-9650568176 E-ISSN: 2584-184X

MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2025; 3(2): 51-58

तिब्बत लामा परंपरा और इसका राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

Author Name: प्रताप दान

1. शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान, भारत

Abstract

<p>तिब्बत में बौद्ध धर्म की स्थापना 7 वीं सदी में राजा सोंग्त्सेन गम्पो के शासनकाल में हुई। 8वीं सदी में गुरु पद्मसंभव ने तांत्रिक बौद्ध धर्म की नींव रखी<em>, </em>जिससे लामा परंपरा का विकास हुआ। 15वीं सदी में जे चोंखापा द्वारा स्थापित गेलुग पंथ ने दलाई लामा की संस्था को मजबूत किया।<em> </em>तिब्बत की लामा परंपरा न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है<em>, </em>बल्कि यह तिब्बत की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में भी गहरा प्रभाव रखती है। इस शोध पत्र का उद्देश्य लामा परंपरा के उद्भव<em>, </em>विकास<em>, </em>धार्मिक-सामाजिक प्रभाव<em>, </em>और तिब्बत-चीन संघर्ष में इसकी भूमिका का विश्लेषण करना है। इसके अलावा<em>, </em>समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस परंपरा के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया है। यह शोध-पत्र मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है।</p>

Keywords

लामा परंपरा, तिब्बत, चीन, राजनीतिक परिप्रेक्ष्य, दलाई लामा।