Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(1): 233-236
डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शैक्षिक विचारों का राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सन्दर्भ में अध्ययन
Author Name: डॉ. धर्मेन्द्र कुमार शर्मा, महेश कुमार
Abstract
<p>डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शैक्षिक विचारों की प्रमाणिकता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020<em> </em>में समाहित है। उनके अनुसार सबकों शिक्षा<em>, </em>गुणवत्ता<em>, </em>मातृभाषा<em>, </em>समान<em>, </em>रोजगारपरक तथा नैतिकतापरक शिक्षा। क्योंकि शिक्षा ही अच्छे लोकतन्त्र<em>, </em>जीवन के सभी मूल्यों तथा संस्कृति को सशक्त करती है। भारतीय शिक्षाविदों जैसे टैगोर<em>, </em>राधाकृष्णन<em>, </em>गाँधी<em>, </em>फूले<em>, </em>विवेकानन्द<em>, </em>अरविन्द जाकिर हुसैन और मालवीय ने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है। प्लेटो का विचार था कि किसी भी राज्य का निर्माण कंकीट और पेड़-पौधों से नहीं होता है<em>, </em>बल्कि उसमें रहने वाले व्यक्तियों के चरित्र से होता है। इन मूल्यवान और उच्च चरित्रवान व्यक्तियों के निर्माण से शिक्षा की विशेष भूमिका होती है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शैक्षिक विचारों ने शिक्षा जगत के साथ-साथ सामाजिक<em>, </em>राजनैतिक<em>, </em>आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने अपने आचारण<em>, </em>भाषणों<em>, </em>लेखों और पुस्तकों में शिक्षा और उसके उद्देश्यों की व्यापक चर्चा की है एवं सुदृढ़ लोकतन्त्र में व्यक्ति का नैतिक<em>, </em>चारित्रक एवं बौद्धिक विकास अत्यन्त आवश्यक है। उनके अनुसार सामाजिक न्याय<em>, </em>समानता और लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापना एक नागरिक में शिक्षा के माध्यम से ही सम्भव है। प्रस्तुत लेख में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शैक्षिक विचारों का राष्ट्रीय शिक्षा नीति-<em>2020</em> के सन्दर्भ में अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।</p>
Keywords
(NEP- 2020) राष्ट्रीय शिक्षा नीति, (Interactive) पारस्परिक क्रियाशीलता, (Educational Idies) शैक्षिक विचार ।
