editor.mrrjournal@gmail.com +91-9650568176 E-ISSN: 2584-184X

MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(2): 49-51

बुन्देलखण्ड केशरी दीवान शत्रुघन सिंह भारत में ग्रामदान गंगा के भागीरथ एवं समग्र क्रांति के उपासक

Author Name: पुष्पेन्द्र कुमार सोनी

1. पी एच डी, शोधार्थी, इतिहास, महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय छतरपुर, मध्य प्रदेश, भारत

Abstract

<p>बुन्देलखण्ड में स्वतन्त्रता संग्राम के लिए अपना सब कुछ लुटा देने वालो में कमी नहीं थी । इन्हीं में से एक थे- ग्राम दान गंगा के भागीरथ बुन्देलखण्ड केसरी क्रांतिवीर दीवान शत्रुघन सिंह जी !</p>

<p>सन् <em>1857</em> के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के बाद देश में स्वतन्त्रता के लिये लिए आन्दोलन चलता रहा । महात्मा गांधी के कुशल नेतृत्व में देश में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आन्दोलन चलाया गया । इन आन्दोलनों में बुन्देलखण्डवासियों ने बढ़ चढ कर हिस्सा लिया । इन्ही में<em> </em>स्वतन्त्रता<em> </em>संग्राम सेनानी बुन्देलखण्ड केसरी दीवान शत्रुघन सिंह तथा उनकी पत्नी रानी राजेन्द्र कुमारी की प्रमुख भूमिका रही । जो देश के स्वतन्त्रता संग्राम में अपना योगदान देकर अमर हो गये ! एक छोटा सा गांव मंगरौठ जो बुन्देलखण्ड में उत्तर प्रदेश राज्य के हमीरपुर जिलें में सरीला तहसील के अन्तर्गत आता हैं । <em>&nbsp;</em>आज भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है । यह भारत का सबसे पहला गांव था जो बिनोवा भावे को ग्राम दान में दिया गया । यह सुझाव मंगरौठ गांव के जमीदार दीवान शत्रुघन सिंह ने विनोबा भावे को ग्राम दान में दिया । दिवान साहब ने अपनी मालकीयत का विसर्जन किया और यह कहते हुए अमर हो गये ।</p>

<p>&nbsp;</p>

<p><strong><em>&quot; </em></strong><strong>सबै भूमि गोपाल की &quot;</strong></p>

Keywords

बुन्देलखण्ड , आन्दोलन , ग्रामदान , गंगा , भागीरथ , हुकूमत , स्वतंत्रता संग्राम ।