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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(3): 348-351

जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य: भौगोलिक विषमताओं का अध्ययन

Author Name: स्मृति यादव, डॉ. अखिलेश यादव

1. शोधार्थी, वाई.बी.एन यूनिवर्सिटी, रांची, झारखंड, भारत

2. शोध निर्देशक, सहायक प्राध्यापक, वाई.बी.एन यूनिवर्सिटी, रांची, झारखंड, भारत

Abstract

<p>यह शोध लेख &ldquo;जलवायु परिवर्तन<em>, </em>वायु प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य: भौगोलिक विषमताओं का अध्ययन&rdquo; विषय पर केंद्रित है<em>, </em>जिसमें यह विश्लेषण किया गया है कि बदलती जलवायु परिस्थितियाँ किस प्रकार वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं और इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ते हैं। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि<em>, </em>वर्षा के पैटर्न में बदलाव तथा चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है<em>, </em>जिससे वायु प्रदूषण की समस्या और अधिक गंभीर हो गई है।इस अध्ययन में विशेष रूप से शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर तथा उससे उत्पन्न श्वसन संबंधी रोगों<em>, </em>हृदय रोगों और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही<em>, </em>भौगोलिक विषमताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित और विकासशील देशों के बीच प्रदूषण के प्रभावों की तुलना की गई है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि विकासशील देशों के घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण वहाँ के लोग अधिक स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करते हैं।इसके अतिरिक्त<em>, </em>जलवायु परिवर्तन के कारण ओजोन स्तर<em>, </em>पार्टिकुलेट मैटर (<em>PM</em>2.5<em>, PM</em>10) तथा अन्य प्रदूषकों में वृद्धि देखी गई है<em>, </em>जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। यह शोध यह भी दर्शाता है कि सामाजिक-आर्थिक स्थिति<em>, </em>स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और क्षेत्रीय नीतियाँ इन प्रभावों को और अधिक जटिल बनाती हैं।अंततः<em>, </em>यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण का संयुक्त प्रभाव मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर वैश्विक चुनौती है<em>, </em>जिसके समाधान हेतु समन्वित नीतियों<em>, </em>सतत विकास उपायों और जागरूकता कार्यक्रमों की अत्यंत आवश्यकता</p>

Keywords

जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य, भौगोलिक विषमता, श्वसन रोग, तापमान वृद्धि, शहरीकरण, पर्यावरण जोखिम, सतत विकास नीति