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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(3): 410-424

धनबाद जिले के अंतर्गत MSME/व्यापारिक ऋणों में NPA: जोखिम-कारक, बैंकिंग प्रक्रियाएँ और समाधान

Author Name: कल्पना कुमारी, डॉ० अशोक कुमार माज़ी

1. शोधार्थी, अर्थशास्त्र विभाग, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय धनबाद, झारखंड, भारत

2. शोध निर्देशक, सह प्राध्यापक स्नातकोत्तर, अर्थशास्त्र विभाग, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय धनबाद, झारखंड, भारत

Abstract

<p>भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ माना जाता है। यह क्षेत्र न केवल लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करता है बल्कि स्थानीय उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देता है। हालांकि, धनबाद जिले में MSME और व्यापारिक ऋणों से जुड़ी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, जिससे बैंकिंग प्रणाली और उद्यमियों दोनों को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस शोध में धनबाद जिले में MSME ऋणों की स्थिति का गहन अध्ययन किया गया है, जिसमें विभिन्न बैंकों के आंकड़े, उद्यमियों के साक्षात्कार और द्वितीयक स्रोतों का विश्लेषण शामिल है।</p>

<p>शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि धनबाद जिले में MSME ऋणों की NPA दर लगभग 12.8% है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यह उच्च दर इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर MSME क्षेत्र कई प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है। प्रमुख कारणों में ऋण स्वीकृति के समय अपर्याप्त मूल्यांकन, बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव, तकनीकी पिछड़ापन और प्रबंधकीय कमजोरियां शामिल हैं। कई उद्यमी आधुनिक तकनीक और वित्तीय प्रबंधन के अभाव में प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं, जबकि बैंकिंग प्रणाली अक्सर उद्यमों की वास्तविक क्षमता का सही आकलन करने में असफल रहती है।</p>

<p>धनबाद की आर्थिक संरचना, जो मुख्य रूप से खनन और भारी उद्योगों पर आधारित है, MSME क्षेत्र के विविधीकरण को सीमित करती है। इसके अलावा, वित्तीय साक्षरता की कमी और नीतिगत जटिलताएं भी उद्यमियों को ऋण चुकाने में कठिनाई पैदा करती हैं। इन परिस्थितियों में NPA की समस्या केवल वित्तीय संकट का संकेत नहीं है, बल्कि यह स्थानीय आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।</p>

<p>इस अध्ययन में यह सुझाव दिया गया है कि बैंकों को ऋण मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि केवल व्यवहार्य और टिकाऊ परियोजनाओं को ही वित्तीय सहायता मिल सके। साथ ही MSME उद्यमों को तकनीकी उन्नयन, डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सशक्त किया जाना चाहिए। उद्यमियों के बीच वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि वे ऋण प्रबंधन और पुनर्भुगतान की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ सकें। सरकार और नीति-निर्माताओं को भी MSME क्षेत्र के लिए विशेष पुनर्गठन योजनाएं और राहत पैकेज तैयार करने चाहिए, जिससे उद्यमों को स्थिरता और विकास का अवसर मिल सके।</p>

<p>अंततः, धनबाद जिले में MSME ऋणों की उच्च NPA दर यह स्पष्ट करती है कि स्थानीय उद्यमों को वित्तीय अनुशासन, तकनीकी सशक्तिकरण और नीतिगत सहयोग की तत्काल आवश्यकता है। यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए तो MSME क्षेत्र न केवल अपनी स्थिरता वापस पा सकता है बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में और भी अधिक योगदान दे सकता है।</p>

Keywords

गैर-निष्पादित परिसंपत्ति, MSME ऋण, धनबाद जिला, जोखिम प्रबंधन, बैंकिंग प्रक्रियाएं, ऋण वसूली