Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2025; 3(2): 89-93
जयपुर की लोक प्रिय संस्कृति में प्रथम पूज्य गणेश : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author Name: वन्दना भारद्वाज, डॉ. शिल्पी गुप्ता
Abstract
<p>प्रस्तुत शोध पत्र जयपुर के चार प्रमुख गणेश मंदिरों — गढ़ गणेश<em>, </em>परकोटा गणेश<em>, </em>मोती डूंगरी गणेश और नाहर के गणेश — के ऐतिहासिक<em>, </em>धार्मिक एवं लोक-सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करता है। इन मंदिरों की स्थापना<em>, </em>स्थापत्य शैली<em>, </em>प्रतिमा स्वरूप<em>, </em>मान्यताओं एवं लोक परम्पराओं का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोध में मौखिक परम्पराओं<em>, </em>लोकगीतों<em>, </em>महंतों से साक्षात्कार तथा उपलब्ध लिखित स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक मंदिर की अपनी विशिष्ट लोकआस्था है — गढ़ गणेश विनायक स्वरूप (बिना सूँड) में सम्भवतः भारत में एकमात्र हैं<em>, </em>परकोटा गणेश मुखाकृति स्वरूप में विवाह की कामना पूर्ण करते हैं<em>, </em>मोती डूंगरी में वाहन पूजन की परम्परा प्रचलित है<em>, </em>जबकि नाहर के गणेश तांत्रिक विधि से स्थापित एवं रोजगार-कामना हेतु पूजित हैं। यह शोध युवा पीढ़ी को भारतीय सनातन संस्कृति एवं धार्मिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से लिखित स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।</p>
Keywords
गणेश, जयपुर, लोक-संस्कृति, गढ़ गणेश, परकोटा गणेश, मोती डूंगरी, नाहर के गणेश, लोकआस्था, मंदिर परम्परा, विनायक, तांत्रिक पूजा, राजस्थान, सांस्कृतिक धरोहर, लोकगीत, धार्मिक मान्यताएँ
