editor.mrrjournal@gmail.com +91-87663-44163 E-ISSN: 2584-184X

MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(8): 253-255

वेदों में वन संरक्षण और लोक में उसकी उपस्थिति

Author Name: सुभाष चंद सैनी, प्रो. डॉ. अशोक भार्गव

1. शोधार्थी, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर, राजस्थान, भारत

2. शिक्षा विभाग, मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर, राजस्थान, भारत

Abstract

<p>भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजनीय माना जाता हैं। हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर थार के मरुस्थल पर्यंत पेड़ पौधों की किसी न किसी रूप में पूजा होती आई हैं। केला, वट, पीपल, आंवला, तुलसी, बिल्व, नीम आदि इसके अनुकरणीय उदाहरण हैं। हमारे देश में ऋषि मुनि ज्यादातर जंगलों में स्थापित आश्रमों और गुरुकुलों में निवास करते थे तथा पेड़ पौधों और हरियाली की वृद्धि एवं सुरक्षा करते थे। आज भी हिंदू धर्म की विशेषता हैं कि यहां मंदिरों में पेड़ पौधे लगाए जाते हैं तथा वर्ष भर उनकी रक्षा व पूजा की जाती हैं। मनुष्य व पेड़-पौधों का जीवन अति घनिष्ठता से जुड़ा हुआ हैं। हिंदू धर्म में वनों को अरण्य कहते हैं और इसके देवता को अरण्यानी देवी कहते हैं। वन देवता और प्रकृति से जुड़े आवास को लोक भाषा में ओरण कहा जाता हैं। इसके विषय में शोधपत्र में शेष विषेष वर्णन किया जाएगा।</p>

Keywords

अरण्य, अरण्यनी, ओरण, वेद, वनस्पति आदि