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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(6): 285-287

डॉ. रामकुमार वर्मा की नाटय यात्रा:

Author Name: डॉ. कर्मेन्द्र सिंह सेंगर

1. प्रवक्ता, हिन्दी,श्री मलखानसिंह महाविद्यालय ठूलई, हाथरस, उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

<p>राम कुमार वर्मा हिंदी साहित्य के प्रमुख नाटककार एवं एकांकीकार के रूप में विशेष पहचान रखते हैं। उनकी नाट्य-यात्रा हिंदी नाट्य-साहित्य के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने ऐतिहासिक<em>, </em>पौराणिक<em>, </em>सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों को आधार बनाकर नाटकीय संवेदना को समृद्ध किया। उनके नाटकों में भारतीय इतिहास और संस्कृति के प्रति गहरी आस्था के साथ मानवीय मनोविज्ञान<em>, </em>प्रेम<em>, </em>त्याग<em>, </em>कर्तव्य<em>, </em>संघर्ष और नैतिक मूल्यों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिलती है। विशेष रूप से हिंदी एकांकी के विकास और उसे साहित्यिक प्रतिष्ठा प्रदान करने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उनके नाट्य-साहित्य में कथानक की संक्षिप्तता<em>, </em>चरित्र-चित्रण<em>, </em>संवादों की प्रभावशीलता<em>, </em>मंचीयता तथा भावात्मकता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। उनकी नाट्य-दृष्टि केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती<em>, </em>बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को भी अभिव्यक्त करती है। प्रस्तुत अध्ययन में राम कुमार वर्मा की नाट्य-यात्रा के विभिन्न चरणों<em>, </em>प्रमुख नाट्य-कृतियों<em>, </em>विषय-वस्तु<em>, </em>चरित्र-योजना<em>, </em>संवाद-शैली<em>, </em>भाषा-शिल्प तथा ऐतिहासिक एवं सामाजिक चेतना का विश्लेषण किया गया है। इस दृष्टि से उनकी नाट्य-यात्रा हिंदी रंगमंच और साहित्य दोनों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करती है।</p>

Keywords

राम कुमार वर्मा, नाट्य-यात्रा, हिंदी नाटक, एकांकी, हिंदी एकांकी, नाट्य-साहित्य, ऐतिहासिक नाटक, पौराणिक नाटक, सामाजिक नाटक, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, मानवीय संवेदना, चरित्र-चित्रण, संवाद-शैली, नाट्य-शिल्प, मंचीयता, मनोवैज्ञानिक दृष्टि।