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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(8): 317-321

डिजिटल युग में श्री अरविंद घोष की समग्र शिक्षा की प्रासंगिकता, संभावनाएं एवं चुनौतियां

Author Name: नीलम देवी, डॉ. अमित भारद्वाज

1. शोधकर्त्री, श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, गजरौला, उत्तर प्रदेश, भारत

2. शोध पर्यवेक्षक, श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, गजरौला, उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

<p>वर्तमान समय को डिजिटल युग का रुप में जाना जाता है। इंटरनेट<em>, </em>कृत्रिम बुद्धिमता<em>, </em>डिजिटल<em>, </em>शिक्षण सामग्रीर<em>, </em>स्मार्ट कक्षा<em>, </em>ऑनलाइन शिक्षा<em>, </em>मोबाइल तकनीक ने शिक्षा के स्वरुप को व्यापक रुप से प्रभावित किया। आज विद्यार्थी विद्यालय चारदीवारी तक सीमित नहीं है। अपितु वह इंटरनेट के माध्यम से विश्व के किसी भी कोने में उपलब्ध ज्ञान पहुंचाया जाता सकता है। डिजिटल तकनीक का सही तरीके से किया गया उपयोग श्री अरविंद की शिक्षा दृष्टि अनेक उद्देश्यों को आधुनिक ज्ञान प्रदान कर सकता है। श्री अरविंद घोष शिक्षा को केवल सूचना या रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं मानते बल्कि मनुष्य के शरीर<em>, </em>प्राण<em>, </em>मन<em>, </em>अंत<em>, </em>चेतना को संतुलित एवं समन्वित विकाास को प्रक्रिया मानते हैं।</p>

<p>दूसरी तरफ तकनीक को शिक्षा का अंतिम लक्ष्य मान लेना ही श्री अरविंद घोष की समग्र दृष्टि के विपरीत हो सकता है। अतः डिजिटल शिक्षा को मानवीय मूल्यों आत्मानुशासन चिंतन रचनात्मक शारीरिक स्वास्थ्य और सयामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना आवश्यक है।</p>

Keywords

श्री अरविंद घोष समग्र शिक्षा, डिजिटल युग, डिजिटल शिक्षा, व्यक्तित्व शिक्षा, शिक्षा की संभावनाएं शिक्षा की चुनौतियां।