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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(SP1): 238-241

ग्रामीण विकास एवं परिवार प्रणाली

Author Name: रूप सिंह

1. शोधकर्ता जेएनवीयू जोधपुर, अतिरिक्त विकास अधिकारी, जिला परिषद जोधपुर, राजस्थान, भारत

Abstract

<p><strong>ग्रामीण परिवारः स्वरूप एवं विशेषताएं</strong><strong>:</strong>परिवार मानव समाज की आधारभूत इकाई है<em>, </em>जिसका जन्म प्राणीशास्त्रीय आवश्यकताओं से हुआ और विकास सांस्कृतिक-सामाजिक आधार पर हुआ। ग्रामीण परिवेश में परिवार का अर्थ केवल एक गृहस्थी समूह नहीं<em>, </em>बल्कि पति-पत्नी<em>, </em>माता-पिता-संतान और भाई-बहनों के प्रगाढ़ संबंधों का जाल है। ग्रामीण परिवारों की मुख्य पहचान उनकी सजातीयता<em>, </em>संयुक्त परिवार प्रणाली<em>, </em>अनुशासन<em>, </em>पितृसत्ता और कृषि पर आधारित आत्मनिर्भरता है। हालांकि<em>, </em>आधुनिक दौर में औद्योगिकीकरण<em>, </em>नगरीकरण और पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव से ये परिवार एकल इकाइयों में परिवर्तित हो रहे हैं।</p>

<p><strong>ऐतिहासिक प्रशासनिक प्रणालियां</strong><strong>:</strong></p>

<p>भारतीय ग्रामीण व्यवस्था ने समय के साथ कई प्रशासनिक बदलाव देखे हैंः</p>

<p>प्राचीन कालः भारतीय ग्राम स्वायत्त गणराज्यों के समान थे। सत्ता के विकेंद्रीकरण के कारण ग्राम सभाएं स्वतंत्र थीं। केंद्र का हस्तक्षेप न्यूनतम था और गांव न्याय व लगान के मामलों में आत्मनिर्भर थे।</p>

<p>मध्यकाल (सल्तनत एवं मुगल काल)ः इस काल में विकेंद्रीकरण की जगह नियंत्रण ने ले ली। मुकद्दम<em>, </em>चैधरी और खूत जैसे पद सृजित हुए जो शासन और जनता के बीच की कड़ी बने। मुगलों ने ग्राम पंचायतों को शिक्षा व सफाई जैसे कार्यों के लिए संरक्षण तो दिया<em>, </em>लेकिन गांवों की निर्भरता परगना अधिकारियों पर बढ़ गई।</p>

<p><strong>ब्रिटिश कालः</strong> यह काल भारतीय गांवों के लिए सर्वाधिक शोषणकारी रहा। अंग्रेजों की भू-राजस्व नीतियों ने ग्रामीण आत्मनिर्भरता को नष्ट कर दिया। किसान निर्धन हो गए और कृषि व्यवस्था चरमरा गई। स्वाधीनता तक आते-आते भारतीय गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित और आर्थिक रूप से पिछड़ गए।</p>

<p><strong>निष्कर्ष एवं वर्तमान स्थिति:<em> </em></strong>स्वतंत्रता के पश्चात लोकतांत्रिक सरकारों ने ग्रामीण विकास के लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ कीं। हालांकि सात दशकों के बाद भी ब्रिटिश काल के प्रतिकूल प्रभावों और कृषि पर बढ़ते दबाव के कारण गांवों की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए शासन-प्रशासन की जवाबदेही और आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों का सही क्रियान्वयन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</p>

Keywords

ग्रामीण, विकास, परिवार, प्रणाली, प्रशासन।