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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(SP1): 245-249

जोधपुर में रियासत कालीन शिक्षा एवं छात्र संगठनों की भूमिका

Author Name: गजेंद्र राठौड

1. सहायक आचार्य, इतिहास, डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय बिलाड़ा, जोधपुर,राजस्थान, भारत

Abstract

<p>शिक्षा मानव के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सामाजिक<em>, </em>सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य जोधपुर रियासतकालीन शिक्षा व्यवस्था में छात्र संगठनों की भूमिका<em>, </em>उनके द्वारा उठाए गए शैक्षिक एवं छात्र हित संबंधी मुद्दों तथा उनके सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभाव का विश्लेषण करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि स्वतंत्रता-पूर्व काल में जोधपुर तथा व्यापक राजपूताना क्षेत्र में विद्यार्थी संगठनों ने शिक्षा की गुणवत्ता<em>, </em>उच्च शिक्षा के विस्तार<em>, </em>ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाओं<em>, </em>योग्य एवं पर्याप्त अध्यापकों की नियुक्ति<em>, </em>निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा तथा शिक्षा के माध्यम जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को प्रमुखता से उठाया। मारवाड़ विद्यार्थी संघ<em>, </em>विद्यार्थी संघ<em>, </em>मुस्लिम स्टूडेंट यूनियन तथा राजपूताना विद्यार्थी कांग्रेस जैसे संगठनों ने विभिन्न प्रस्तावों<em>, </em>बैठकों एवं ज्ञापनों के माध्यम से तत्कालीन शासन का ध्यान विद्यार्थियों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया।</p>

<p>जोधपुर रियासत की उपलब्ध अभिलेखीय सामग्री से यह भी ज्ञात होता है कि विद्यार्थी संगठन केवल शैक्षिक समस्याओं तक सीमित नहीं थे<em>, </em>बल्कि उनमें संगठनात्मक चेतना<em>, </em>नेतृत्व क्षमता<em>, </em>राष्ट्रवाद एवं सामाजिक परिवर्तन की भावना भी विकसित हो रही थी। विशेष रूप से राजपूताना विद्यार्थी कांग्रेस द्वारा उच्च शिक्षा में हिंदुस्तानी माध्यम<em>, </em>ग्रामीण शिक्षा के विस्तार<em>, </em>समान पाठ्यक्रम एवं मानकों तथा निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा से संबंधित प्रस्ताव उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं। इन मुद्दों में से अनेक आज भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था के समकालीन विमर्श में प्रासंगिक हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा<em>, </em>ग्रामीण-शहरी शैक्षिक असमानता<em>, </em>शिक्षा का लोकतंत्रीकरण तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे विषय वर्तमान शिक्षा नीति में भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। अतः यह अध्ययन निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि जोधपुर रियासतकालीन छात्र संगठनों ने न केवल तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई<em>, </em>बल्कि विद्यार्थी चेतना<em>, </em>नेतृत्व विकास<em>, </em>राष्ट्रवादी भावना और सामाजिक परिवर्तन की आधारभूमि तैयार करने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।</p>

Keywords

जोधपुर रियासत, आधुनिक शिक्षा, छात्र संगठन, राजपूताना विद्यार्थी कांग्रेस।