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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(9): 194-195

सनातन धर्म ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण एक अध्ययन

Author Name: सुभाष चन्द सैनी, प्रो. डॉ. अशोक भार्गव

1. शोधार्थी, शिक्षा विभाग, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान, भारत

2. शोध निदेशक, शिक्षा विभाग, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान, भारत

Abstract

<p>विश्व के अन्य धर्मों ने पर्यावरण को मनुष्य के उपयोग की वस्तु माना<em>, </em>जबकि सनातन धर्म ने पर्यावरण को धर्म का ही रूप मान लिया। प्रस्तुत शोध का मुख्य तर्क है कि सनातन ऋषियों ने पर्यावरण को बचाने के लिए कानून नहीं<em>, </em>बल्कि धर्म का ताना-बाना बुना। वृक्ष काटना पाप<em>, </em>जल में मल त्यागना पाप<em>, </em>जीव हत्या पाप - इस पाप-पुण्य की अवधारणा ने बिना पुलिस और वन विभाग के पर्यावरण को हजारों साल तक बचाए रखा। इस शोध में धर्मशास्त्रों<em>, </em>स्मृतियों और पुराणों से ऐसे धर्म-सूत्रों को निकाला गया है जो सीधे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े हैं।</p>

Keywords

धर्मशास्त्र, पर्यावरण धर्म, पाप-पुण्य, पंचमहाभूत, लोक आस्था