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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(6): 298-308

औपनिवेशिक काल में झारखण्ड की महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति: एक ऐतिहासिक अध्ययन (1765–1947)

Author Name: Rukhsana Praveen

1. Research Scholar, Department of History, Faculty of Social Science and Humanities Radha Govind University, Ramgarh, Jharkhand, India

Abstract

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प्रस्तुत शोध में औपनिवेशिक शासन के दौरान झारखण्ड की महिलाओं के जीवन में आए सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का अध्ययन किया गया है। झारखण्ड की सामाजिक संरचना जनजातीय एवं गैर-जनजातीय समुदायों की विविधता से निर्मित थी, जिसके कारण महिलाओं की स्थिति भी एकरूप नहीं थी। आदिवासी महिलाओं को कृषि, वन-आधारित गतिविधियों तथा सामुदायिक जीवन में अपेक्षाकृत अधिक सहभागिता प्राप्त थी, जबकि गैर-आदिवासी समाज में जाति, पितृसत्ता और सामाजिक रूढ़ियों का प्रभाव अधिक दिखाई देता था। औपनिवेशिक भूमि एवं राजस्व नीतियों ने पारंपरिक सामुदायिक भूमि व्यवस्था को प्रभावित किया। भूमि से बेदखली, बढ़ती आर्थिक निर्भरता तथा वन संसाधनों पर सरकारी नियंत्रण का महिलाओं के दैनिक जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ा। कृषि, पशुपालन, वनोपज संग्रह और घरेलू उत्पादन में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था, किंतु उनके श्रम को औपचारिक आर्थिक अभिलेखों में पर्याप्त मान्यता नहीं मिली। खनन, औद्योगीकरण और मजदूरी आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार ने महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए, लेकिन कम मजदूरी, कठिन कार्य परिस्थितियों और दोहरे श्रम-बोझ जैसी समस्याएँ भी सामने आईं। विस्थापन और प्रवासन ने उनकी सामाजिक एवं आर्थिक असुरक्षा को बढ़ाया। मिशनरी शिक्षा और आधुनिक सामाजिक चेतना ने कुछ क्षेत्रों में महिला शिक्षा तथा जागरूकता के विकास में योगदान दिया। अध्ययन से निष्कर्ष निकलता है कि औपनिवेशिक शासन ने झारखण्ड की महिलाओं के जीवन में अवसरों और चुनौतियों-दोनों को जन्म दिया। महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए इतिहास का अध्ययन लैंगिक, सामाजिक तथा स्थानीय दृष्टिकोण से किया जाना आवश्यक है।</p>

Keywords

झारखण्ड, औपनिवेशिक काल, महिलाएँ, जनजातीय समाज, महिला श्रम, सामाजिक परिवर्तन।