21वीं सदी का वैश्विक सुरक्षा ढांचा एक अभूतपूर्व रणनीतिक संक्रमण काल से गुजर रहा है। समकालीन संघर्षों की बहु-आयामी प्रकृति ने थॉमस हॉब्स, हंस जोआचिम मोर्गेंथाउ , और केनेथ वाल्ट्ज़ जैसे पश्चिम-केंद्रित यथार्थवादी (Westphalian Realist) सिद्धांतों की सीमाओं को उजागर कर दिया है, जो आज के हाइब्रिड और नेटवर्क-आधारित युद्धों को समझाने में संकुचित सिद्ध हो रहे हैं। यह शोध पत्र मिलिट्री साइंस (सैन्य विज्ञान) के दृष्टिकोण से आचार्य कौटिल्य के मण्डल सिद्धान्त (Theory of Circles) और उनके द्वादशराज मण्डल (12 Kings Matrix) का एक अभिनव पुनर्मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। लेख का मुख्य तर्क यह है कि प्राचीन भारतीय सामरिक चिंतन में निहित भौगोलिक संकेंद्रित वृत्त केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक मल्टी-डोमेन वॉरफेयर (cyber, space, and information domains) तथा असममित (Asymmetric) युद्ध कला के अदृश्य मोर्चों पर भी पूरी तरह सटीक बैठते हैं। यह शोध यह विश्लेषण करता है कि कैसे तकनीकी एकीकरण और 'ग्रे-जोन ऑपरेशंस' के इस दौर में 'अरि' (शत्रु) और 'मित्र' के पारंपरिक समीकरण बदल चुके हैं, तथा 'उदासीन' (Neutral) एवं 'मध्यम' (Intermediary) राज्यों की भूमिका वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर रही है। अंततः, यह पत्र पश्चिमी सिद्धांतों की बाइनरी (द्विध्रुवीय) सोच को चुनौती देते हुए रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और बहु-संरेखण (Multi-alignment) को समझने के लिए कौटिल्य के मण्डल को एक गतिशील, लचीला और व्यावहारिक 'सामरिक सॉफ्टवेयर' के रूप में स्थापित करता है।
मण्डल सिद्धान्त, द्वादशराज मण्डल, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, असममित युद्ध, तूष्णीं युद्ध, रणनीतिक स्वायत्तता, हाइब्रिड युद्ध कौशल।
Dr. Arvind Kumar, Prashant Kumar Pandey. -राजनीति से परे: बहु-क्षेत्रीय और असममित युद्ध के युग में कौटिल्य के मण्डल सिद्धान्त की प्रासंगिकता (Beyond Geopolitics: Relevance of Kautilya’s Mandala Siddhanta in the Era of Multi-Domain and Asymmetric Warfare.). Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(10):55-65
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