editor.mrrjournal@gmail.com +91-9650568176 E-ISSN: 2584-184X
Submit Paper

MRR

  • Home
  • About Us
    • INDEXING
    • JOURNAL POLIICY
    • PLAGIARISM POLICY
    • PEER REVIEW POLICY
    • OPEN ACCESS POLICY
    • PUBLICATION ETHICS
    • PRIVACY STATEMENT
  • Editorial Board
  • Publication Info
    • Article Submission
    • Submission Guidelines
    • Publication Ethics
    • Journal Policies
    • Aim and Scope
  • Articles & Issues
    • Current Issue
    • Archives
  • Authors Instruction
  • Contact

MRR Journal

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2024; 2(7):76-80

प्रेमचंद के गबन में सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाएँ

Authors: मेरी तिर्की; प्रो० डॉ० संजय कुमार;

1. शोधार्थी, हिन्दी विभाग, वाई. बी. एन. विश्वविद्यालय, राँची, झारखंड, भारत

2. शोध निर्देशक, हिन्दी विभाग, वाई. बी. एन. विश्वविद्यालय, राँची, झारखंड, भारत

Paper Type: Research Paper
Article Information
Received: 2024-06-15   |   Accepted: 2024-07-20   |   Published: 2024-07-25
Abstract

प्रेमचंद (1880–1936) हिंदी साहित्य के अग्रणी कथाकारों में से एक थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय समाज, राजनीति और संस्कृति के विविध पहलुओं को यथार्थवादी दृष्टिकोण से चित्रित किया। प्रस्तुत संकलन में आजादी (1930), महाजनी (1931), कायाकल्प (1932), यशोधरा (1933), नीला (1934), कर्मभूमि (1932), मंगलसूत्र (1933), शाम सवेरे (1934) और बड़े भाई साहब (1935) जैसी प्रमुख रचनाएँ शामिल हैं। इन कृतियों में सामाजिक विषमता, आर्थिक शोषण, स्त्री-पुरुष संबंध, नैतिक संघर्ष और स्वाधीनता आंदोलन के भावनात्मक व वैचारिक आयामों को रेखांकित किया गया है। प्रेमचंद की भाषा सहज, प्रभावी और जनभाषा के निकट है, जिससे उनके साहित्य में पाठकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित होता है। यह संग्रह हिंदी साहित्य के सामाजिक यथार्थ और सांस्कृतिक चेतना के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

 

Keywords

प्रेमचंद, गबन, मानव मूल्य, समाजशास्त्रीय अध्ययन, सामाजिक यथार्थ, नैतिक संकट, भौतिकवाद, उपभोक्तावाद, प्रतिष्ठा की लालसा, पारिवारिक संबंध, नैतिक पतन, सामाजिक संरचना, स्त्री-पुरुष संबंध, भारतीय समाज, आर्थिक दबाव, यथार्थवाद, मानवीय संवेदनाएँ, त्याग, ईमानदारी, सामाजिक परिवर्तन।

How to Cite

. प्रेमचंद के गबन में सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाएँ. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2024; 2(7):76-80

Download PDF

Useful Links

  • Home
  • About us
  • Editorial Board
  • Current Issue
  • All Issues
  • Submit Paper

Indexing

MRR

Contact Us

Phone: +91-9650568176
Email: editor.mrrjournal@gmail.com | editor.mrrjournal@gmail.com

© Copyright MRR 2023. All Rights Reserved