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Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(2):160-166

झारखंड में मानव तस्करी का सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण

Authors: कुमारी रमा उपाध्याय; डॉ. दीपक कुमार सिंह;

1. शोधार्थी, समाजशास्त्र, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद, झारखंड, भारत

2. शोध पर्यवेक्षक, सहायक प्रोफेसर-समाजशास्त्र, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद, झारखंड, भारत

Paper Type: Research Paper
Article Information
Received: 2026-01-02   |   Accepted: 2026-01-26   |   Published: 2026-02-14
Abstract

मानव तस्करी वर्तमान समय की एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक तथा मानवाधिकार से संबंधित समस्या है, जिसका प्रभाव विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्गों पर अधिक पड़ता है। भारत के विभिन्न राज्यों में यह समस्या अलग-अलग रूपों में देखने को मिलती है, जबकि झारखण्ड जैसे खनन एवं औद्योगिक राज्य में गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा तथा पलायन जैसी परिस्थितियाँ मानव तस्करी को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारक के रूप में उभरती हैं।

इस शोध का मुख्य उद्देश्य झारखण्ड में मानव तस्करी की स्थिति, उसके प्रमुख कारणों, सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों तथा रोकथाम और निवारण के उपायों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में प्राथमिक तथा द्वितीयक दोनों प्रकार के स्रोतों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक स्रोतों के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी, संस्थाओं के अनुभव तथा क्षेत्रीय अवलोकन को शामिल किया गया है, जबकि द्वितीयक स्रोतों में सरकारी रिपोर्ट, NCRB के आँकड़े, विभिन्न शोध-पत्र, पुस्तकों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों का अध्ययन किया गया है।

अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि मानव तस्करी के प्रमुख कारणों में गरीबी, रोजगार के सीमित अवसर, शिक्षा का अभाव, सामाजिक असमानता, तथा झूठे प्रलोभनों के माध्यम से लोगों को बहलाकर अन्य राज्यों या देशों में ले जाना प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, शहरी क्षेत्रों में सस्ते श्रम की मांग तथा संगठित अपराध समूहों की सक्रियता भी इस समस्या को बढ़ाती है।

मानव तस्करी के प्रभाव केवल पीड़ित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इसका असर परिवार, समुदाय और समाज की संरचना पर भी पड़ता है। शारीरिक शोषण, मानसिक आघात, शिक्षा से वंचित होना, तथा सामाजिक असुरक्षा इसके प्रमुख परिणाम हैं।

अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं, जिनमें जनजागरूकता, शिक्षा का प्रसार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, तथा सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Keywords

मानव तस्करी, झारखण्ड, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ, गरीबी, पलायन, बाल श्रम, महिला शोषण, संगठित अपराध, रोकथाम एवं निवारण, पुनर्वास, मानवाधिकार, श्रम शोषण, ग्रामीण विकास, शिक्षा और जागरूकता

How to Cite

. झारखंड में मानव तस्करी का सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(2):160-166

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