झारखण्ड के देवघर जिले के संदर्भ में श्रम प्रवास (labour migration) ग्रामीण जीवन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक आयाम बन चुका है। यह केवल रोजगार प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि परिवारों की संरचना, जीवन-स्तर, सामाजिक संबंधों, लैंगिक भूमिकाओं तथा सांस्कृतिक व्यवहारों को प्रभावित करने वाली एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है। सीमित स्थानीय रोजगार अवसरों, कृषि आय की अनिश्चितता और बेहतर आय की तलाश के कारण देवघर जिले के अनेक ग्रामीण परिवारों के सदस्य देश के विभिन्न औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों—जैसे दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों—में कार्य करने के लिए प्रवास करते हैं। इस प्रकार श्रम प्रवास स्थानीय अर्थव्यवस्था और पारिवारिक जीवन दोनों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन गया है। देवघर जिला ऐतिहासिक, धार्मिक और आदिवासी दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहाँ की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और आजीविका के लिए कृषि, असंगठित श्रम, छोटे व्यापार और सेवा कार्यों पर निर्भर है। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण कई परिवारों के सदस्य मौसमी या दीर्घकालिक प्रवास को अपनाते हैं। इससे एक ओर परिवारों को बाहरी आय (remittances) प्राप्त होती है, तो दूसरी ओर पारिवारिक संरचना और दैनिक जीवन की जिम्मेदारियों में परिवर्तन आता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य देवघर जिले के प्रवासी श्रमिक परिवारों पर श्रम प्रवास के शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक भूमिकाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना है। अध्ययन के लिए जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से 240 प्रवासी श्रमिक परिवारों का चयन किया गया और उनसे प्राथमिक आँकड़े प्रश्नावली तथा साक्षात्कार के माध्यम से एकत्र किए गए। इसके अतिरिक्त, जनगणना रिपोर्ट, सरकारी दस्तावेज़ों, और प्रवास से संबंधित पूर्व अध्ययनों जैसे द्वितीयक स्रोतों का भी उपयोग किया गया, जिससे विश्लेषण को व्यापक और विश्वसनीय बनाया जा सके। अध्ययन के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि श्रम प्रवास का प्रभाव द्विआयामी (dual impact) है। एक ओर, प्रवास के माध्यम से प्राप्त आय परिवारों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाती है, जिससे उपभोग स्तर, आवास सुधार, और स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि देखने को मिलती है। कई परिवारों में रेमिटेंस के कारण बच्चों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना आसान हुआ है। दूसरी ओर, प्रवास के कारण परिवार के प्रमुख सदस्य की अनुपस्थिति बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक देखभाल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विशेष रूप से यह पाया गया कि बालिका शिक्षा पर अपेक्षाकृत अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, क्योंकि घरेलू जिम्मेदारियाँ अक्सर लड़कियों पर आ जाती हैं।
लैंगिक भूमिकाओं के संदर्भ में अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि पुरुष सदस्यों के प्रवास के बाद महिलाओं की पारिवारिक निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ती है और वे आर्थिक तथा सामाजिक जिम्मेदारियों को अधिक सक्रिय रूप से निभाने लगती हैं। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक भूमिका में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रवास से प्राप्त आय के कारण स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि और चिकित्सा सेवाओं तक पहुँच में सुधार दिखाई देता है। फिर भी, लंबे समय तक परिवार से दूर रहने की स्थिति में मानसिक तनाव, अकेलापन और सामाजिक असुरक्षा जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ भी सामने आती हैं, जो प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों दोनों को प्रभावित करती हैं। समग्र रूप से, यह अध्ययन दर्शाता है कि देवघर जिले में श्रम प्रवास केवल आर्थिक आवश्यकता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव परिवारों के जीवन के विभिन्न आयामों में दिखाई देते हैं। यह शोध ग्रामीण विकास नीतियों, शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा महिला सशक्तिकरण योजनाओं के लिए उपयोगी दृष्टिकोण प्रदान करता है।
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. प्रवासी श्रमिक परिवारों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं लैंगिक भूमिकाओं पर श्रम प्रवास का प्रभाव: एक क्षेत्रीय अध्ययन (देवघर जिला, झारखण्ड के विशेष संदर्भ में). Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(2):239-248
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