यह शोध-लेख भारत की विदेश नीति के बदलते आयामों का समकालीन वैश्विक संदर्भ में विश्लेषण करता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की विदेश नीति आदर्शवाद, पंचशील और गुटनिरपेक्षता जैसे सिद्धांतों पर आधारित रही, किंतु शीतयुद्ध की समाप्ति तथा सोवियत संघ के विघटन के बाद इसमें यथार्थवादी एवं आर्थिक दृष्टिकोण का समावेश हुआ। लेख में ‘लुक ईस्ट’ से ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘पड़ोस प्रथम’ नीति, आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता, आर्थिक कूटनीति, वैश्विक संगठनों में सक्रिय भागीदारी तथा कोविड-19 काल में ‘वैक्सीन मैत्री’ जैसे प्रयासों का विश्लेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त भारत-अमेरिका, रूस, इज़राइल तथा अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय संतुलन की नीति को भी रेखांकित किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत ने अपनी विदेश नीति को अधिक व्यवहारिक, संतुलित और प्रभावशाली बनाया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
Keywords
भारत की विदेश नीति, गुटनिरपेक्षता, पंचशील, पड़ोस प्रथम नीति, एक्ट ईस्ट नीति, आर्थिक कूटनीति, आतंकवाद, रणनीतिक साझेदारी, वैक्सीन मैत्री, वैश्विक राजनीति, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
How to Cite
. भारत की विदेश नीति के बदलते आयाम.
Indian Journal of Modern Research and Reviews.
2025; 3(11):88-91