भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर निर्भर करती है। चुनावी वित्तपोषण राजनीतिक दलों की गतिविधियों, चुनाव प्रचार और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है। विभिन्न भारतीय अध्ययनों के अनुसार चुनावों में बढ़ता धनबल लोकतांत्रिक समानता को प्रभावित कर सकता है तथा राजनीतिक प्रक्रिया में असंतुलन उत्पन्न कर सकता है। इस शोध-पत्र में 2022 तक उपलब्ध भारतीय अध्ययनों के आधार पर चुनावी वित्तपोषण की प्रकृति, स्रोत, कानूनी व्यवस्था तथा राजनीतिक दलों में पारदर्शिता के स्तर का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पारदर्शी वित्तीय ढांचा लोकतंत्र की विश्वसनीयता बढ़ाता है, जबकि अपारदर्शी वित्तपोषण राजनीतिक जवाबदेही को कमजोर करता है। इसलिए चुनावी सुधार और वित्तीय पारदर्शिता भारतीय लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक हैं।
चुनावी वित्तपोषण; राजनीतिक दल; पारदर्शिता; लोकतंत्र; चुनाव सुधार; राजनीतिक जवाबदेही
. भारत में चुनावी वित्तपोषण और राजनीतिक दलों की पारदर्शिता: एक तुलनात्मक अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2025; 3(12):103-105
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