भारत वर्तमान में जनसांख्यिकीय संक्रमण के अंतिम विस्तार चरण में है, तथा धीरे-धीरे जनसंख्या स्थिरीकरण की ओर अग्रसर हो रहा है। इस संक्रमण काल में जनसंख्या शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रारंभिक चरण में जनसंख्या शिक्षा का उद्देश्य जनसंख्या विस्फोट तथा उसके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति जागरूकता विकसित करना था, किंतु वर्तमान समय में भारत के समक्ष उभर रही जनसांख्यिकीय चुनौतियाँ भिन्न स्वरूप धारण कर चुकी हैं। भारत में कुल प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ चुकी है, वृद्ध होती जनसंख्या का अनुपात बढ़ रहा है, विवाह की औसत आयु में परिवर्तन हो रहा है तथा संतान प्राप्ति की इच्छा में गिरावट देखी जा रही है। इसके अतिरिक्त महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उच्च शिक्षा में नामांकन की दर भी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य इन नवीन जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के आलोक में जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्यों एवं पाठ्यक्रम की पुनर्संरचना की आवश्यकता को रेखांकित करना है।
जनसंख्या शिक्षा, कुल प्रजनन दर, वृद्ध होती जनसंख्या, जनसांख्यिकीय संक्रमण, जनसांख्यिकीय लाभांश, महिलाओं का आर्थिक समावेशन।
निखिलेश शर्मा. भारत में जनसंख्या शिक्षा: जनसांख्यिकीय संक्रमण के बदलते संदर्भ में पुनर्संरचना की आवश्यकता. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(SP1):152-154
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