प्रस्तुत शोध पत्र जयपुर के चार प्रमुख गणेश मंदिरों — गढ़ गणेश, परकोटा गणेश, मोती डूंगरी गणेश और नाहर के गणेश — के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं लोक-सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करता है। इन मंदिरों की स्थापना, स्थापत्य शैली, प्रतिमा स्वरूप, मान्यताओं एवं लोक परम्पराओं का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोध में मौखिक परम्पराओं, लोकगीतों, महंतों से साक्षात्कार तथा उपलब्ध लिखित स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक मंदिर की अपनी विशिष्ट लोकआस्था है — गढ़ गणेश विनायक स्वरूप (बिना सूँड) में सम्भवतः भारत में एकमात्र हैं, परकोटा गणेश मुखाकृति स्वरूप में विवाह की कामना पूर्ण करते हैं, मोती डूंगरी में वाहन पूजन की परम्परा प्रचलित है, जबकि नाहर के गणेश तांत्रिक विधि से स्थापित एवं रोजगार-कामना हेतु पूजित हैं। यह शोध युवा पीढ़ी को भारतीय सनातन संस्कृति एवं धार्मिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से लिखित स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।
गणेश, जयपुर, लोक-संस्कृति, गढ़ गणेश, परकोटा गणेश, मोती डूंगरी, नाहर के गणेश, लोकआस्था, मंदिर परम्परा, विनायक, तांत्रिक पूजा, राजस्थान, सांस्कृतिक धरोहर, लोकगीत, धार्मिक मान्यताएँ
. जयपुर की लोक प्रिय संस्कृति में प्रथम पूज्य गणेश : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2025; 3(2):89-93
Download PDF