स्तनपान की अवधि मातृ पोषण, शिशु वृद्धि और भविष्य के स्वास्थ्य परिणामों के लिए अत्यंत संवेदनशील चरण है। इस अवधि में माता के शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, लौह, फोलेट, विटामिन B12, कैल्शियम, विटामिन D, आयोडीन तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता सामान्य अवस्था की तुलना में अधिक रहती है। यदि स्तनपान कराने वाली महिला में पोषक तत्वों की कमी बनी रहती है, तो इसका प्रभाव केवल माता की थकान, अनीमिया, प्रतिरक्षा, कार्यक्षमता और प्रसवोत्तर स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शिशु की प्रतिरक्षा, संक्रमण-जोखिम, वृद्धि, वजन-वृद्धि, विकास और पूरक आहार की स्वीकृति पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। प्रस्तुत अध्ययन धनबाद जिले के संदर्भ में मातृ पोषण, स्तनपान व्यवहार और 0-12 माह के शिशुओं से जुड़े पोषण-जोखिमों का द्वितीयक डेटा आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। डेटा स्रोत के रूप में NFHS-4, NFHS-5, धनबाद जिला पोषण प्रोफाइल, HMIS और 2025 के पोषण ट्रैकर पर आधारित सरकारी/प्रमाणित आँकड़ों का उपयोग किया गया है। परिणामों से स्पष्ट होता है कि धनबाद में विशेष स्तनपान में सुधार दिखाई देता है, किंतु गर्भावस्था में IFA सेवन, शीघ्र स्तनपान आरंभ, बच्चों का पर्याप्त आहार और मातृ अनीमिया अभी भी गंभीर चिंता का विषय हैं। 2020 में धनबाद में गैर-गर्भवती महिलाओं में अनीमिया 65% तथा गर्भवती महिलाओं में 46% दर्ज हुआ। बच्चों में अनीमिया 67% रहा और 2025 के पोषण ट्रैकर में धनबाद के 0-5 वर्ष बच्चों में बौनापन 37.82%, दुबलापन 6.94% और कम वजन 14.95% दर्ज हुआ। निष्कर्षतः मातृ पोषण सुधार, स्तनपान परामर्श, IFA अनुपालन, आहार विविधता और आंगनवाड़ी-स्वास्थ्य तंत्र के अभिसरण को धनबाद में प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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. स्तनपान कराने वाली महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी का मातृ स्वास्थ्य तथा 0-12 माह के शिशुओं पर प्रभाव: धनबाद जिले के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(5):197-205
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