डिजिटल मीडिया ने सूचना, शिक्षा, संचार और आर्थिक अवसरों तक पहुँच को बढ़ाकर सामाजिक परिवर्तन की नई संभावनाएँ उत्पन्न की हैं। आदिवासी महिलाएँ, जो लैंगिक, आर्थिक और सामाजिक वंचनाओं का सामना करती हैं, डिजिटल माध्यमों के जरिए सशक्तिकरण के नए अवसर प्राप्त कर रही हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य डिजिटल मीडिया और आदिवासी महिला सशक्तिकरण के संबंध का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषण करना तथा इसकी सैद्धांतिक पुनर्व्याख्या प्रस्तुत करना है। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों एवं प्रमुख समाजशास्त्रीय सिद्धांतों—नेटवर्क समाज सिद्धांत, सामाजिक पूँजी सिद्धांत, क्षमता दृष्टिकोण, नारीवादी सिद्धांत तथा इंटरसेक्शनैलिटी पर आधारित है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि डिजिटल मीडिया सामाजिक पूँजी निर्माण, सांस्कृतिक पहचान, राजनीतिक सहभागिता तथा निर्णय क्षमता को बढ़ाने में सहायक है, किंतु डिजिटल विभाजन, डिजिटल पितृसत्ता और साइबर चुनौतियाँ इसकी प्रभावशीलता को सीमित करती हैं। अध्ययन के आधार पर आदिवासी डिजिटल एजेंसी रूपरेखा (TDAF) प्रस्तावित किया गया है, जो डिजिटल पहुँच से बहुआयामी सशक्तिकरण तक की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। यह शोध आदिवासी महिला सशक्तिकरण को समझने के लिए एक समग्र समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण प्रदान करता है।
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विजय सिंह, डॉ. हितेंद्र सिंह राठौड़. डिजिटल मीडिया और आदिवासी महिला सशक्तिकरण: समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में एक सैद्धांतिक पुनर्व्याख्या. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2025; 3(5):87-92
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