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Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2025; 3(12):175-180

आदिवासी शिक्षा का ऐतिहासिक विकास-झारखंड के संदर्भ मे

Authors: माया कुमारी; डॉ. शरधा कुमारी;

1. शोधार्थी, समाजशास्त्र विभाग, वाई.बी.एन यूनिवर्सिटी, रांची, झारखंड, भारत

2. शोध निर्देशिका, सहायक प्राध्यापक, वाई.बी.एन यूनिवर्सिटी, रांची झारखंड, भारत

Paper Type: Research Paper
Article Information
Received: 2025-10-12   |   Accepted: 2025-11-28   |   Published: 2025-12-30
Abstract

झारखंड के आदिवासी समाज में शिक्षा का ऐतिहासिक विकास सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा आर्थिक परिवर्तनों से गहराई से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में आदिवासी समुदायों में औपचारिक शिक्षा व्यवस्था का अभाव था, किंतु उनकी अपनी समृद्ध लोकज्ञान परंपरा, सामुदायिक शिक्षण प्रणाली, प्रकृति आधारित जीवन-दर्शन तथा मौखिक ज्ञान-संप्रेषण की विशिष्ट पद्धति विद्यमान थी। परिवार, समुदाय, अखड़ा, लोकगीत, लोककथाएँ तथा पारंपरिक रीति-रिवाज ही शिक्षा के प्रमुख माध्यम थे। औपनिवेशिक काल में ईसाई मिशनरियों तथा ब्रिटिश प्रशासन द्वारा कुछ विद्यालयों की स्थापना की गई, जिससे औपचारिक शिक्षा का प्रारंभ हुआ। हालांकि उस समय शिक्षा का लाभ सीमित क्षेत्रों एवं सीमित समुदायों तक ही पहुँच सका।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारतीय संविधान ने अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक विकास को विशेष संरक्षण प्रदान किया। संविधान के अनुच्छेद 46, आरक्षण नीति, छात्रवृत्ति योजनाओं, आश्रम विद्यालयों तथा जनजातीय कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी शिक्षा के विस्तार के लिए अनेक प्रयास किए गए। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के बाद जनजातीय शिक्षा को नई प्राथमिकता मिली। विद्यालयों की संख्या में वृद्धि, छात्रावासों की स्थापना, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, समग्र शिक्षा अभियान तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 जैसी पहलों ने शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसके बावजूद आदिवासी शिक्षा अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। आर्थिक विषमता, भौगोलिक दुर्गमता, मातृभाषा एवं शिक्षण भाषा का अंतर, विद्यालयी अवसंरचना की कमी, डिजिटल असमानता तथा सामाजिक जागरूकता का सीमित स्तर अभी भी शिक्षा के समग्र विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं। फिर भी यह स्पष्ट है कि शिक्षा ने झारखंड के आदिवासी समाज में सामाजिक चेतना, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा लोकतांत्रिक सहभागिता को नई दिशा प्रदान की है। अतः आदिवासी शिक्षा का ऐतिहासिक विकास केवल शैक्षिक परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक संरक्षण तथा समावेशी विकास की सतत प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अध्याय है।

Keywords

आदिवासी शिक्षा, झारखंड, ऐतिहासिक विकास, जनजातीय समाज, पारंपरिक शिक्षा, लोकज्ञान, औपनिवेशिक शिक्षा, मिशनरी विद्यालय, संवैधानिक संरक्षण, अनुसूचित जनजाति, समग्र शिक्षा, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, छात्रवृत्ति, मातृभाषा आधारित शिक्षा, शैक्षिक विकास, सामाजिक परिवर्तन, महिला शिक्षा, समावेशी शिक्षा, सतत विकास।.

How to Cite

माया कुमारी, डॉ. शरधा कुमारी. आदिवासी शिक्षा का ऐतिहासिक विकास-झारखंड के संदर्भ मे. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2025; 3(12):175-180

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