शिक्षण क्षेत्र को समाज में सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारी देने वाले क्षेत्रों में से एक माना जाता है। वर्तमान समय में शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए; वे प्रशासनिक दायित्वों, ऑनलाइन शिक्षण, मूल्यांकन, अभिभावकों की आवश्यकताओं, नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन और तकनीकी बदलावों के साथ निरंतर जुड़े हुए हैं। इन परिस्थितियों के कारण शिक्षकों में कार्य तनाव और बर्नआउट की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो उनके मनोवैज्ञानिक कल्याण, कार्य संतुष्टि और शिक्षण गुणवत्ता पर पड़ता है। हाल के वैश्विक अध्ययनों से पता चला है कि लंबी अवधि के कार्य तनाव से भावनात्मक थकान, कार्य के प्रति उदासीनता और व्यक्तिगत उपलब्धि की भावना में कमी आती है, जिससे अंततः बर्नआउट होता है।
यह अध्ययन शिक्षकों के कार्य तनाव, बर्नआउट और मनोवैज्ञानिक कल्याण के बीच के संबंध को देखना है और इन दोनों का मनोवैज्ञानिक कल्याण पर प्रभाव जानना है।
अध्ययन में वर्णनात्मक अनुसंधान अभिकल्प और सहसंबंधात्मक अनुसंधान अभिकल्प दोनों का उपयोग किया गया है। अध्ययन के लिए 200 शिक्षकों का स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिदर्श चुना गया था। आंकड़े संकलन के लिए Maslach Burnout Inventory, Ryff Psychological Well-being Scale और कार्य तनाव सूचकांक का प्रयोग किया गया। Average, Standard Deviation, Pearson Correlation, and Multiple Regression were used to analyse data. SPSS प्रयोग किया गया था।
काल्पनिक परिणामों के अनुसार, कार्य तनाव और बर्नआउट के बीच शिक्षकों में उच्च धनात्मक सहसंबंध पाए गए, जबकि बर्नआउट और कार्य तनाव दोनों का मनोवैज्ञानिक कल्याण के साथ सार्थक ऋणात्मक संबंध पाया गया। अध्ययन ने पाया कि विद्यालयों में सकारात्मक नेतृत्व, कार्यभार का संतुलन, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सहयोगात्मक वातावरण बनाने से शिक्षकों का मनोवैज्ञानिक कल्याण बढ़ाया जा सकता है।
कार्य तनाव, बर्नआउट, मनोवैज्ञानिक कल्याण, शिक्षक, मानसिक स्वास्थ्य, विद्यालय।
डॉ. अभिलाष कुमार जैन, डॉ. शिखा जैन. शिक्षकों के कार्य तनाव, बर्नआउट एवं मनोवैज्ञानिक कल्याण का अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(7):98-105
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