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Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(8):101-106

21वीं सदी में पण्डित गोविन्दबल्लभ पंत के विचारों की प्रासंगिकता

Authors: पूजा; डॉ. अमित भारद्वाज;

1. शोधकत्री, श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, गजरौला, उत्तर प्रदेश, भारत

2. शोध पर्यवेक्षक, श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, गजरौला, उत्तर प्रदेश, भारत

Paper Type: Research Paper
Article Information
Received: 2026-06-07   |   Accepted: 2026-08-09   |   Published: 2026-08-14
Abstract

पण्डित गोविन्दबल्लभ पंत आधुनिक भारत के उन प्रमुख राष्ट्रनिर्माताओं में सम्मिलित थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन, लोकतांत्रिक राजनीति, सामाजिक सुधार, भूमि सुधार, ग्रामीण विकास, शिक्षा, भाषा, राष्ट्रीय एकता तथा प्रशासनिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन केवल औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक, संवैधानिक और सामाजिक संरचना के निर्माण से भी गहराई से जुड़ा हुआ था। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और बाद में भारत के केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, जमींदारी उन्मूलन, किसानों के अधिकारों, हिन्दी के विकास, राज्यों के पुनर्गठन और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए कार्य किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य पण्डित गोविन्दबल्लभ पंत के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, भाषायी एवं प्रशासनिक विचारों का विश्लेषण करते हुए 21वीं सदी के भारत में उनकी प्रासंगिकता को स्पष्ट करना है। यह अध्ययन ऐतिहासिक, वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पद्धति पर आधारित है। अध्ययन में पंत के चयनित भाषणों, पत्रों, सरकारी दस्तावेजों, संविधान, भूमि सुधार से संबंधित विधायी अभिलेखों तथा उपलब्ध द्वितीयक साहित्य का उपयोग किया गया है। sअध्ययन से स्पष्ट होता है कि लोकतांत्रिक शुचिता, उत्तरदायी शासन, सामाजिक न्याय, ग्रामीण आत्मनिर्भरता, किसान कल्याण, मातृभाषा में प्रशासन, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव से संबंधित पंत के विचार आज भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। साथ ही उनकी भाषा और केंद्रीकृत प्रशासन संबंधी धारणाओं को वर्तमान बहुभाषिक, संघीय और वैश्विक संदर्भ में संतुलित रूप से पुनर्व्याख्यायित करने की आवश्यकता है। निष्कर्षतः पंत का चिंतन 21वीं सदी में संवैधानिक लोकतंत्र, समावेशी विकास, नैतिक राजनीति और उत्तरदायी लोक प्रशासन के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है।

Keywords

गोविन्दबल्लभ पंत, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, भूमि सुधार, राजभाषा, राष्ट्रीय एकता, सुशासन, ग्रामीण विकास।

How to Cite

पूजा, डॉ. अमित भारद्वाज. 21वीं सदी में पण्डित गोविन्दबल्लभ पंत के विचारों की प्रासंगिकता. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(8):101-106

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