प्रस्तुत शोध झारखंड के गढ़वा जिले में युवाओं (15-30 वर्ष आयु वर्ग) के बीच मादक द्रव्यों के सेवन में हुई चिंताजनक वृद्धि और उसके परिणामस्वरूप सामाजिक-पारिवारिक पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों का अध्ययन करता है। ऐतिहासिक रूप से मजबूत सामुदायिक मूल्यों से जुड़े गढ़वा जिले में पारंपरिक नशों के स्थान पर अत्यधिक घातक सिंथेटिक ड्रग्स (ब्राउन शुगर) और फार्मास्युटिकल ओपियोइड्स के बढ़ते प्रसार के कारण वर्तमान में एक गंभीर जनसांख्यिकीय संकट पैदा हो गया है। मिश्रित शोध पद्धति पर आधारित इस अध्ययन में 250 उत्तरदाताओं (जिसमें सक्रिय/पुनर्वासित नशेड़ी, प्रभावित परिवार, पुलिस प्रशासन और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं) के प्रतिदर्श का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि गढ़वा की भौगोलिक संवेदनशीलता (उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के साथ साझा खुली सीमाएं), तीव्र युवा बेरोजगारी, भविष्य की चिंता और पीयर प्रेशर (दोस्तों का दबाव ) इस महामारी को बढ़ावा देने वाले प्राथमिक कारक हैं। विश्लेषण दर्शाता है कि नशे की इस लत का सीधा संबंध पारिवारिक ढांचे के बिखराव से है, जो घरेलू हिंसा, आर्थिक तबाही और माता-पिता के मानसिक आघात के रूप में सामने आ रहा है। सामाजिक स्तर पर, इस संकट ने स्थानीय छोटे अपराधों (छिनतई, चोरी) में 65% की वृद्धि की है और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाला है। अंततः, यह शोध पत्र इस सामाजिक-व्यवहार्य आपातकाल को नियंत्रित करने और क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त सीमा पुलिसिंग, सुलभ सरकारी नशामुक्ति बुनियादी ढांचे और सक्रिय सामुदायिक-पारिवारिक काउंसलिंग के एक त्रि-स्तरीय सुधारात्मक ढांचे का प्रस्ताव करता है।
मादक द्रव्यों का सेवन, गढ़वा जिला, युवा व्यसन, पारिवारिक विघटन, सिंथेटिक ड्रग्स, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, सीमा तस्करी।
राज कुमार सिंह. झारखंड का गढ़वा जिला: युवाओं में बढ़ती नशीली पदार्थों की लत और बिखरता सामाजिक एवं पारिवारिक वातावरण. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(9):35-40
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