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Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(6):295-297

सुधा अरोडा के कहानियों में स्त्री चरित्र

Authors: डॉ. शेख मोहसीन शेख रशीद;

1. सहयोगी अध्यायक, हिंदी विभाग, कला महाविद्यालय, बिडकीन, तह. पैठण, जि. छ. संभाजीनगर, महाराष्ट्र, भारत

Paper Type: Research Paper
Article Information
Received: 2026-05-10   |   Accepted: 2026-06-28   |   Published: 2026-06-30
Abstract

हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करने वाली प्रमुख लेखिकाओं में सुधा अरोड़ा का महत्वपूर्ण स्थान है। उनके साहित्य में समकालीन भारतीय स्त्री के सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, मानसिक, भावनात्मक, राजनीतिक तथा सांप्रदायिक जीवन की विविध स्थितियों का यथार्थपरक चित्रण मिलता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में सुधा अरोड़ा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के साथ-साथ उनके साहित्य में उपस्थित स्त्री चरित्रों का विश्लेषण किया गया है। उनकी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से पितृसत्तात्मक व्यवस्था, स्त्री-शोषण, पारिवारिक असमानता, वैवाहिक तनाव, तलाक, घरेलू दायित्व, भावनात्मक उपेक्षा, सामाजिक रूढ़ियों तथा स्त्री की अस्मिता जैसे प्रश्नों को रेखांकित किया गया है। ‘मरी हुई चीज’, ‘बगैर तराशे हुए’, ‘दमनचक्र’, ‘युद्धविराम’, ‘महानगर की मैथिली’, ‘रहोगी तुम वही’, ‘काला शुक्रवार’, ‘यथास्थिति’, ‘नमक’ और ‘आधी आबादी’ जैसी रचनाओं में स्त्री जीवन के विविध संघर्षों और अंतर्विरोधों को अभिव्यक्ति मिली है। सुधा अरोड़ा की स्त्री पात्र केवल पीड़ित अथवा शोषित रूप में प्रस्तुत नहीं होतीं, बल्कि वे परिस्थितियों से संघर्ष करने वाली, आत्मसम्मान और अस्तित्व की खोज करने वाली चेतनाशील स्त्रियों के रूप में भी सामने आती हैं। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि लेखिका ने सामान्य भारतीय स्त्री के जीवनानुभवों को संवेदनशीलता और बेबाकी के साथ प्रस्तुत करते हुए स्त्री विमर्श को सामाजिक यथार्थ से जोड़ा है। इस प्रकार, सुधा अरोड़ा का साहित्य समकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता, संघर्ष, चेतना और मुक्ति की प्रभावशाली अभिव्यक्ति के रूप में महत्वपूर्ण है।

Keywords

सुधा अरोड़ा, स्त्री विमर्श, स्त्री अस्मिता, नारी चेतना, पितृसत्ता, स्त्री संघर्ष, सामाजिक यथार्थ, हिंदी कहानी, नारी मुक्ति, स्त्री चरित्र।

How to Cite

डॉ. शेख मोहसीन शेख रशीद. सुधा अरोडा के कहानियों में स्त्री चरित्र. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(6):295-297

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