विश्व के अन्य धर्मों ने पर्यावरण को मनुष्य के उपयोग की वस्तु माना, जबकि सनातन धर्म ने पर्यावरण को धर्म का ही रूप मान लिया। प्रस्तुत शोध का मुख्य तर्क है कि सनातन ऋषियों ने पर्यावरण को बचाने के लिए कानून नहीं, बल्कि धर्म का ताना-बाना बुना। वृक्ष काटना पाप, जल में मल त्यागना पाप, जीव हत्या पाप - इस पाप-पुण्य की अवधारणा ने बिना पुलिस और वन विभाग के पर्यावरण को हजारों साल तक बचाए रखा। इस शोध में धर्मशास्त्रों, स्मृतियों और पुराणों से ऐसे धर्म-सूत्रों को निकाला गया है जो सीधे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े हैं।
धर्मशास्त्र, पर्यावरण धर्म, पाप-पुण्य, पंचमहाभूत, लोक आस्था
सुभाष चन्द सैनी, प्रो. डॉ. अशोक भार्गव. सनातन धर्म ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण एक अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(9):194-195
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