डिजिटल क्रांति ने भारत में युवाओं के जीवन के प्रत्येक पहलू को गहराई से प्रभावित किया है। यह शोध पत्र डिजिटल युग में सामाजिक कार्य की बदलती भूमिका और युवाओं के संदर्भ में साइबर जागरूकता के स्तर का अध्ययन करता है। अध्ययन की प्रासंगिकता इस तथ्य से प्रबल है कि भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है, और यह जनसांख्यिकीय लाभ अगली दो दशकों तक बना रहेगा। डिजिटल वातावरण आज डिजिटल मूल निवासियों और डिजिटल प्रवासियों दोनों के लिए सामाजिक क्रिया का एक अनिवार्य बाहरी वातावरण बन गया है, जिससे सामाजिक कार्य को डिजिटल साधनों को अपनाने और डिजिटल स्थान में प्रवेश करने की आवश्यकता है। यह शोध मिश्रित विधि (गणनात्मक एवं गुणात्मक) पर आधारित है, जिसमें प्राथमिक स्रोत से प्रश्नावली के माध्यम से तथा द्वितीयक स्रोत से विभिन्न शोध पत्रों, पत्रिकाओं और सरकारी रिपोर्टों से समंक एकत्र किए गए हैं। प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय युवाओं में साइबर जागरूकता का स्तर असमान है, जहाँ एक ओर संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने जागरूकता को 43ः से 90ः तक बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर लगभग 37ः युवा साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं और 51ः ने कभी साइबर सुरक्षा पर कोई सत्र नहीं लिया है। अध्ययन पर्यावरण में व्यक्ति दृष्टिकोण पर आधारित सैद्धांतिक ढांचे का उपयोग करता है, जो डिजिटल परिवेश में व्यक्ति और उसके वातावरण के बीच अंतक्र्रिया पर केंद्रित है। शोध के परिणाम यह संकेत देते हैं कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को डिजिटल दक्षताओं से सुसज्जित होना चाहिए और युवाओं को डिजिटल साक्षरता से सशक्त बनाना चाहिए। “यह अध्ययन डिजिटल युग में सामाजिक कार्य को एक समावेशी, प्रगतिशील और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप विकसित होने वाली प्रक्रिया के रूप में पुनर्परिभाषित करने पर जोर देता है।”
डिजिटल सामाजिक कार्य, साइबर जागरूकता एवं सुरक्षा, युवा।
डॉ. अशोक श्रीवास्तव, अंकित सिंह. डिजिटल युग में सामाजिक कार्य एवं साइबर जागरूकता: युवाओं के संदर्भ में एक अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(9):259-264
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